राग और बंदिश
Teacher : Varun vyas sir , Rakesh sir, Shree Ram Chaturvedi sir Students : Shiksha Thakur , Ankit Mishra , Sourabh Choubey , Sandesh Saraf भूपाली राग , यमन राग , बागेश्वरी राग ताल : 3 ताल तीन ताल उत्तर भारत के संगीत, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध तालों में से एक है।[1] यह लयबद्ध सरंचना का सममित स्वरूप है।[2]यह कुल सोलह (16) मात्राओं का ताल हैं । धा धिं धिं धा । धा धिं धिं धा । धा तिं तिं ता । ता धिं धिं धा । प्रारंभ राग भूपाली यह कल्याण थाट का अौडव जाति का राग है। इसमें म और न बिल्कुल वर्जित है वादी ग संवादी ध है इसके गायन का समय रात्रि प्रथम पहर अर्थात सायंकाल है आरोह : सा रे ग प ध सा आरोह : सा ध प ग रे सा पकड़ : ग रे सा ध सा रे गा प ग ध प ग रे सा बंदिश : गुरु की महिमा गाई सब ने अज हरि हर से न्यारी जग में अंतरा जो वन दे चारो फल पाए तर जाए भाव सागर पल में स्थाई के आलाप : 1. Ga --- re --- ga _ re _ re _ sa --- sa _ dha _ sa re ga --- re --- sa --- 2. Ga --- pa --- dha --- pa --- dha pa ga re...